कुछ आस, कुछ निरास,
कुछ बुझी, बुझी सी प्यास,
कुछ विश्वासों के ढहने की टीस,
कुछ, न मिल पाने की खीज।
कुछ खुशबू, कुछ काटे
कुछ दूसरो से मिले, कुछ अपनों ने भी बांटे।
कुछ मेरी, कुछ तेरी कहानी
कुछ खरा - खारा सा पानी।
एक अनमने, मासूम बच्चे से दिल की
जीवन से आपाधापी।
मेरी कविता, मेरा परिचय,
मेरी आपबीती।
मेरी कविता, मेरा परिचय,
मेरी आपबीती।
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Saturday, August 10, 2013
Monday, June 24, 2013
मेरे ख्वाब.
तुझे देखता रहू ,
या सांसो की डोर थामे रहु.
न देखा, तो क्या जी पाउँगा।
देखता रहा, सांसे न ले पाउँगा।
कौन है तु.
तू शायद, अलसुबह देखा ख्वाब हैं,
जो इतना सच्चा लगता हैं
कि साँसे रोक देता हैं।
लगता है वही जीना, जीने लायक हैं।
लेकिन जब टूटता है,
तो फिर साँसे रोक देता हैं।
फिर भी मैं, अपने अन्दर के बच्चे को समझाता हूँ.
ख्वाब एक ख्वाब ही तो है.
ख्वाब ही रहा होगा।
और जीते चला जाता हूँ।
बहता और बीतता रहता हूँ।
लेकिन जब कभी थोड़ी सी भी फुर्सत मिलती हैं
मेरे ख्वाब तुम बहुत याद आते हो.
तुम मुझे बहुत याद आते हो...
या सांसो की डोर थामे रहु.
न देखा, तो क्या जी पाउँगा।
देखता रहा, सांसे न ले पाउँगा।
कौन है तु.
तू शायद, अलसुबह देखा ख्वाब हैं,
जो इतना सच्चा लगता हैं
कि साँसे रोक देता हैं।
लगता है वही जीना, जीने लायक हैं।
लेकिन जब टूटता है,
तो फिर साँसे रोक देता हैं।
फिर भी मैं, अपने अन्दर के बच्चे को समझाता हूँ.
ख्वाब एक ख्वाब ही तो है.
ख्वाब ही रहा होगा।
और जीते चला जाता हूँ।
बहता और बीतता रहता हूँ।
लेकिन जब कभी थोड़ी सी भी फुर्सत मिलती हैं
मेरे ख्वाब तुम बहुत याद आते हो.
तुम मुझे बहुत याद आते हो...
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