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Monday, July 27, 2026

जंतर मंतर छात्र आंदोलन - लोकतंत्र की ख़ुशबू



पिछले 10-20 सालों में जितने लोगो से मिला हूँ, इरफान का ज़मीर के टक्कर का कोई नहीं मिला, उनकी आत्मा - उनकी आवाज़ एक अलग ही ख़ुशबू बिखेरती है. देश-काल को वैसा ही जीते - देखते है जैसा वो है, क्योकि जमीन के सबसे करीब है. और देश काल अधिकतम के लिए बहुत कड़वा है, कसैला है और निर्मम है. उन्हें सुनता रहा और आँसू जम कर बरसे. व्यक्ति की गरिमा - लोकतंत्र को नापने का अंतिम परिमाण है. इरफान साक्षर नहीं बने लेकिन शिक्षित बनने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. शिक्षा व्यक्ति को उसके जमीर को सबसे ऊपर रखने की कुव्वत देती है. सच का सामना ज़मीर ही कर सकता है, बाक़ी अपनी आँखे और औक़ात दोनों नीचे रखते है. कितने है जो संविधान की प्रस्तावना को याद भी रख पाते है, आत्मसात करना बहुत दूर की कौड़ी है. फिर से लिखता हूँ - व्यक्ति की गरिमा - ये भारत के संविधान का तुम्हें दिया गया सबसे खूबसूरत उपहार है. इसके साथ जहाँ ज़रूरत है जाइए - देश के सारे नौकर तुम्हारे आदेश का इंतजार कर रहे है. लेकिन उस आत्मविश्वास के साथ जो इरफ़ान में महक रहा है. ये महक सिर्फ़ मालिक से आती है. इंक़लाब ज़िन्दाबाद.

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