ख़ामोशी में ये कैसा शोर हैं।
शोर में ये कैसी ख़ामोशी हैं।
आँखों में ये कैसा, पानी हैं।
होंठो पर ये कैसी हंसी हैं।
अमृत भी पीना हैं,
मर मर कर जीना हैं।
जहर भी पीना हैं।
जी जी कर मरना हैं।
होश में ये कैसी बेहोशी हैं।
बेहोशी में एक अजीब सा होश हैं।
कोई कहता, सदा तुम हो।
कोई कहता खानाबदोश हैं.
ख्वाइशों में ये कैसी नफरत हैं।
नफ़रतो मे ये कैसी ख्वाइश हैं।
जमीर का पर्दा नंगा करके।
जख्मो की कैसी नुमाइश हैं।
ये कैसा वक्त हैं।
कमबख्त हैं।
अरमानो को ज़हर देकर।
नोच लो वजूद को।
टुकड़ो में बाट दो, हाड मांस को।
न्योता दे दो, गिद्धों को।
तेरे जीने का कोई मतलब नहीं।
तेरे इंसा होने का, कोई मतलब नहीं।
Sunday, April 24, 2016
Tuesday, April 12, 2016
श श..भारत गहरी नींद में सो रहा हैं।
श श श श श श श..... भारत गहरी नींद में सो रहा हैं। या यूँ कहा जाये, सोने का नाटक कर रहा हैं। और सब शामिल हैं। ज्ञानी, अज्ञानी , मुर्ख, राजा , प्रजा , शिक्षक, रक्षक , न्यायविद। कृपया आप भी सो जाये.
Tuesday, February 23, 2016
राजनीती देश और अवाम
प्रिय राहुल, नेतागण और सभी पहले , दूसरे तीसरे , चौथे स्तम्भ।
हर मुद्दे पर विरोध नहीं होता, मेरे दोस्त। हर मुद्दे के दो पक्ष नहीं होते। कुछ मुद्दो पर एक ही पक्ष होता है , देश का पक्ष। देश के लिए शहीद, का पक्ष। देश की अवाम का पक्ष।
कुछ मुद्दो पर राजनीती की नहीं जाती , बल्कि उसे , सरकार और देश को मजबूत बनाया जाता हैं।
अफ़सोस , तुम्हे किसी ने ये बताया ही नहीं। राजनीती देश और अवाम को सशक्त बनाने का साधन हैं , स्वयंम कोई साध्य नहीं।
समय चूनौती देता है और अवसर भी। कोई भी मुद्दा हो, एक अवसर होता हैं , देश और समाज की दशा और दिशा देने और बदलने का। राजनीती सिर्फ विरोध नहीं हैं। राजनीती लीड करने और लीडर देने का नाम हैं।
हर गंभीर मुद्दा एक लक्षण हैं , कही कुछ बीमारी हैं। लेकिन , राजनीतिज्ञ उसे सिर्फ और सड़ाते हैं और सप्रेस करते हैं। और हमारा सस्ता , दो टके का मीडिया ? छोड़ो यार।
विदा करो और मुक्त करो इस देश को महापुरुषों के नामो से। जो चूनौतिया उन्हें दिखी , उन्होंने निर्णय लिए। समय की सापेक्षता के हिसाब से।
किन्तु समय परिवर्तित हैं। हम क्या कर रहे हैं ? हम ने कौन से निर्णय लिए ? हमने निर्णय के अवसरों को सिर्फ गवाया हैं। कभी किसी महापुरुष , कभी जाती , कभी धर्म , कभी गरीब के नाम पर। हर बीमारी के नए टिके ईजाद होते हैं , हम ये नहीं कहते उसी कंपनी का टिका जो ५० साल पहले बना , उपयोग करेंगे क्योकि वह कंपनी पूजनीय हैं। वह कंपनी भगवान बन मंदिर में बैठी हैं। फिर किसी व्यक्ति के लिए क्यों ?
पुराने टिके से नयी बीमारी ठीक नहीं होगी।
नए सवाल चाहिए और नए हल।
देश निर्णय से बनता हैं।
राजनीती करने से नहीं।
ये निर्णय के क्षण हैं।
समय साक्षी हैं।
अवाम अभी भी कल्कि की प्रतीक्षा में आँखे धुंधली कर नपुंसक खड़ी हैं।
हर मुद्दे पर विरोध नहीं होता, मेरे दोस्त। हर मुद्दे के दो पक्ष नहीं होते। कुछ मुद्दो पर एक ही पक्ष होता है , देश का पक्ष। देश के लिए शहीद, का पक्ष। देश की अवाम का पक्ष।
कुछ मुद्दो पर राजनीती की नहीं जाती , बल्कि उसे , सरकार और देश को मजबूत बनाया जाता हैं।
अफ़सोस , तुम्हे किसी ने ये बताया ही नहीं। राजनीती देश और अवाम को सशक्त बनाने का साधन हैं , स्वयंम कोई साध्य नहीं।
समय चूनौती देता है और अवसर भी। कोई भी मुद्दा हो, एक अवसर होता हैं , देश और समाज की दशा और दिशा देने और बदलने का। राजनीती सिर्फ विरोध नहीं हैं। राजनीती लीड करने और लीडर देने का नाम हैं।
हर गंभीर मुद्दा एक लक्षण हैं , कही कुछ बीमारी हैं। लेकिन , राजनीतिज्ञ उसे सिर्फ और सड़ाते हैं और सप्रेस करते हैं। और हमारा सस्ता , दो टके का मीडिया ? छोड़ो यार।
विदा करो और मुक्त करो इस देश को महापुरुषों के नामो से। जो चूनौतिया उन्हें दिखी , उन्होंने निर्णय लिए। समय की सापेक्षता के हिसाब से।
किन्तु समय परिवर्तित हैं। हम क्या कर रहे हैं ? हम ने कौन से निर्णय लिए ? हमने निर्णय के अवसरों को सिर्फ गवाया हैं। कभी किसी महापुरुष , कभी जाती , कभी धर्म , कभी गरीब के नाम पर। हर बीमारी के नए टिके ईजाद होते हैं , हम ये नहीं कहते उसी कंपनी का टिका जो ५० साल पहले बना , उपयोग करेंगे क्योकि वह कंपनी पूजनीय हैं। वह कंपनी भगवान बन मंदिर में बैठी हैं। फिर किसी व्यक्ति के लिए क्यों ?
पुराने टिके से नयी बीमारी ठीक नहीं होगी।
नए सवाल चाहिए और नए हल।
देश निर्णय से बनता हैं।
राजनीती करने से नहीं।
ये निर्णय के क्षण हैं।
समय साक्षी हैं।
अवाम अभी भी कल्कि की प्रतीक्षा में आँखे धुंधली कर नपुंसक खड़ी हैं।
Wednesday, January 6, 2016
" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं! "
कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मानवविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा।
उसने एक टोकनी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।
बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।
फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकनी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।
जैसे ही उसने, रेड़ी स्टेडी गो कहा.....
तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?
सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए, पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।
जब मानवविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?
तो उन्होंने कहा---" उबुन्टु ( Ubuntu ) "
जिसका मतलब है,
" कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों ? "
उबुन्टु ( Ubuntu ) का उनकी भाषा में मतलब है,
" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं! "
उसने एक टोकनी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।
बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।
फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकनी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।
जैसे ही उसने, रेड़ी स्टेडी गो कहा.....
तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?
सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए, पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।
जब मानवविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?
तो उन्होंने कहा---" उबुन्टु ( Ubuntu ) "
जिसका मतलब है,
" कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों ? "
उबुन्टु ( Ubuntu ) का उनकी भाषा में मतलब है,
" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं! "
Tuesday, June 2, 2015
जन्मदिन मुबारक : कुछ जीवन अनुभव .
छोटे भाई का जन्मदिन हैं , कुछ लिख कर भेजा हैं।
- कभी झूठ नहीं बोलना , जब तक वो किसी बड़े भले की लिए न हो।
- ना कहना सीखना उन कामो के लिए, जो करना नहीं चाहते या कर नहीं सकते।
- साल में कम से कम ,१० अच्छी किताबे पढूंगा। अंग्रेजी की भी, नहीं आती तो अंग्रेजी सीखूंगा।
- साल में २१ दिन ध्यान को दूंगा , हो सके तो आश्रम जाकर।
- साल में एक बार दूरस्थ यात्रा।
- चर्बी / वजन कम करूँगा और हर दूसरे -तीसरे दिन , योग , तेज चलना और मसल का व्यवयाम।
- नया काम शुरू करने से बेहतर हैं , किसी रुके काम को पहले ख़त्म करना।
- अपने दोस्त और मासूम आत्माए जिन्हे मदद की जरुरत हैं, उनकी मदद करना और बदले में कोई भी अपेक्षा नहीं रखना।
- जिन्होंने मदद की, उनका धन्यवाद करना।
- महीने में किसी एक रिश्तेदार / दोस्त को अचानक फ़ोन करना।
- परिवर्तन अच्छा हैं। खुद करे तो सबसे अच्छा।
- जीवन हर रोज नया शुरू होता हैं। याददाश्त उसे पुराना बताती हैं। भूल जाओ कचरे को या कैथार्सिस से फेक दो बाहर।
- जितना हो सके डेटा और तथ्यों से मूल्यांकन करना।
- कौन कह रहा हैं नहीं, बल्कि क्या कह रहा हैं। क्या कह रहा हैं नहीं, बल्कि क्या कर रहा हैं , क्या कर रहा हैं नहीं , बल्कि क्या हो रहा हैं। कान से बहुत ज्यादा , आँखे बताती हैं।
- स्नेह , मोह से बहुत ज्यादा मूल्यवान हैं।
- कोई एक आर्ट सीखना, कुछ भी। तबला , वायलिन, सैक्सोफोन , बांसुरी या कुछ भी। आंकड़े/व्यवसाय/विज्ञानं जीवन का निर्वाह करते हैं, उसे सरल बनाते हैं। कला जीवन से प्रेम हैं, लग्जरी हैं। ओवरफ्लो हैं। अज्ञात के प्रति प्रेम और समर्पण हैं।
आज इतना ही।
राहुल
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