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Sunday, October 9, 2011

स्टीव जोब्स: बूंद समानी समुंद में.


स्टीव जोब्स: अलविदा, हम तुम्हारे ऋणी हैं इस बात के की आपने इस दुनिया को ओर खुबसूरत बनाया. जिस दिन उनके बारे में,मैने पहली बात पढ़ा, समझ गया, किसी बुद्ध से परिचय हुआ. बिना लिखे रहा नहीं गया. एक बुद्ध व्यक्तित्व, पश्चिम का पूरब को, हमारे ऋषियों की श्रेणी का जवाब. अलविदा स्टीव..तुम्हे भुलाना नामुमकिन हैं... 
एक बूंद सागर में समां गई, यही अंतिम सत्य हैं.  उनके खुद के शब्दों में: 
"Almost everything--all external expectations, all pride, all fear of embarrassment or failure--these things just fall away in the face of death, leaving only what is truly important. Remembering that you are going to die is the best way I know to avoid the trap of thinking you have something to lose. You are already naked. There is no reason not to follow your heart."

ओर यही बात मुझे इतना प्रभावित कर गई कि इस साल अपने से वादा किया कि :"दिल की ही सुनूंगा, कहूँगा और दिल से ही जिऊंगा'"..कभी उस प्रयोग के बारे में भी बात करने कि कोशिश करूँगा.

जैसे मौत के सन्दर्भ में जहा "बूंद समुन्द्र में समां जाती हैं", वैसे ही जीवन के रहस्यों के सन्दर्भ में, छोटी छोटी बातो में बड़े बड़े सागर छुपे होते हैं. जितना गोता गहरा, उतना मोती पाने की संभावना...या यूँ कंहू...समुंद समाना बूंद में...

1 comment:

  1. सच में विश्व को एक नयी दिशा देकर न जाने कौन सी दिशा स्वयं मुड़ गया वह युगपुरुष।

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