जनता यहाँ हमेशा तमाशाबीन रही है और संघर्ष से मुँह चुरा मनोरंजन खोजती है। मुद्दों को तो जनता ने दरकिनार किया, नेता क्या करेंगे।
डिमांड और सप्लाई अपना काम दिखाता है।
भारत के चुनाव भी कुछ इसी तरह होते है। मनोरंजक।
ये चुनाव भी।
एक स्वाभाविक कॉमेडियन है. पूरी दक्षता और क्षमता के साथ कॉमेडी रचते है। बच्चे भी कई बार आश्चर्य में पड़ जाते है , ऐसा कौन करता है और कैसे कर लेता है भाई।
दूसरे कमाल के जादूगर, पूरा सर्कस रचते है. मायावी दुनिया में ले जाके अंगूठे से मदिरा चुसवा नशे का आभास करवाते है और जनता डिमो(DeMo) की जगह नशे में मोडी - मोडी बड़बड़ाती है।
लेकिन शशश। .......देश सो रहा है।
धीरे से बोलो - "मेरा भारत महान"। ...देश सो रहा है। ......कही उठ न जाये , नहीं तो कॉमेडियन और जादूगर भागते फिरेंगे और देश जात - पात - आरक्षण - अपराध , तुष्टिकरण ,कमीनापन, जनसख्या रूपक कैंसर , मुफ्तखोरी से हटकर इंसानियत, मेरिटोक्रेसी, प्राइड, थोड़े लेकिन अच्छे लोग , हैप्पीनेस इंडेक्स और sustainability अपना लेगा। एक हिन्दू प्राइड पहचान बनेगी और देश खुद अपने पैरो पर खड़ा होकर अनुसन्धान उन्मुखी प्रगति करेगा।
और मेरी नींद फिर खुल गई।
सपने अक्सर सोने नहीं देते है।
#JagteRaho
Monday, April 29, 2019
Friday, March 1, 2019
मेरा भारत फिर भी महान
नंगा राजा
तमाशाबीन
ताली ठोकती जनता
भूख भगवान है
तन मन बाजार
बास मारते आदर्श
क्रिकेट धर्म
क्रिकेटर हीरो
जब तक गोलिया सरहद
तक है
जब तक उन्हें झेलते सीने पडोसी के है
हमें क्या
NCC नहीं बेटा
वहा टाइम वेस्ट नहीं करो
क्योकि वहा तो डिसिप्लिन सिखाते है
वो क्यों चाहिए
क्रिकेट खेलो
टीवी पे आ जाओ किसी तरह
बड़ा दो माँ बाप का गौरव इस तरह।
ये टुच्चापन
हमारी आत्मा से आती बदबू है
घिन आती है
शांति पसंद राष्ट्र मेरा
गुलाम की करेंसी से ही सही
शांति ख़रीदेंगे
गुलाम होना
सब सहन कर लेना
पेट भरने के लिए
आत्मा बेचना
हमारा परिचय
इन्द्रिय जनित सुख, क्रिकेट धर्म
विकसित देश का वीसा
वास्तविक इन्फ्लेशन को अगूंठा दिखती
काले पैसे की पोषक
कुछ रियल एस्टेट
देश की पूंजी को
चाटते, बाटते, अपराधियों को पालते
और जमीं को आसमान तक महंगा करने वालो को पोषते
और NPA बनाते बैंक मैनेजर और उनके आका
ऐश करते है
फिर भी उन्ही बैंको मे
८% FD कराते समाजवादी मुर्ख
फिर अपने और बच्चो के लिए
एक बेहतर समाज और नौकरियों
की उम्मीद रखते है।
और हा
इन सब के बीच
अगर २६ जनुअरी
और १५ अगस्त
और उरी ,
और पुलवामा,
और कारगिल
और संसद हमला ,
और सम्झौता एक्सप्रेस हमला
और काबुल भारतीय दूतावास हमला
और २६/११ मुंबई
और १९६५ , १९७१ युद्ध
और सरहद
और सिज़ फायर में रोज मरते सैनिक
और अंत मे
फिर भी
आपको झेलता,
टूटता,
लड़खिड़ाता
जयचंदो से घाव खाता
फिर भी आपको सहजता
देश और सैनिक याद आ जाये
तो
भारत माता की जय
जय हिन्द।
मेरा भारत महान।
मत बोलना।
अच्छा नहीं लगता।
आईने देख कर
भीतर की सड़ांध देख लेना
और अपनी काहलियत
और बेबसी पर
फुट फुट कर रो लेना।
बस.
सुना है इस युग में
आंसू
गंगा की तरह पाप धोते है.
तमाशाबीन
ताली ठोकती जनता
भूख भगवान है
तन मन बाजार
बास मारते आदर्श
क्रिकेट धर्म
क्रिकेटर हीरो
जब तक गोलिया सरहद
तक है
जब तक उन्हें झेलते सीने पडोसी के है
हमें क्या
NCC नहीं बेटा
वहा टाइम वेस्ट नहीं करो
क्योकि वहा तो डिसिप्लिन सिखाते है
वो क्यों चाहिए
क्रिकेट खेलो
टीवी पे आ जाओ किसी तरह
बड़ा दो माँ बाप का गौरव इस तरह।
ये टुच्चापन
हमारी आत्मा से आती बदबू है
घिन आती है
शांति पसंद राष्ट्र मेरा
गुलाम की करेंसी से ही सही
शांति ख़रीदेंगे
गुलाम होना
सब सहन कर लेना
पेट भरने के लिए
आत्मा बेचना
हमारा परिचय
इन्द्रिय जनित सुख, क्रिकेट धर्म
विकसित देश का वीसा
वास्तविक इन्फ्लेशन को अगूंठा दिखती
काले पैसे की पोषक
कुछ रियल एस्टेट
देश की पूंजी को
चाटते, बाटते, अपराधियों को पालते
और जमीं को आसमान तक महंगा करने वालो को पोषते
और NPA बनाते बैंक मैनेजर और उनके आका
ऐश करते है
फिर भी उन्ही बैंको मे
८% FD कराते समाजवादी मुर्ख
फिर अपने और बच्चो के लिए
एक बेहतर समाज और नौकरियों
की उम्मीद रखते है।
और हा
इन सब के बीच
अगर २६ जनुअरी
और १५ अगस्त
और उरी ,
और पुलवामा,
और कारगिल
और संसद हमला ,
और सम्झौता एक्सप्रेस हमला
और काबुल भारतीय दूतावास हमला
और २६/११ मुंबई
और १९६५ , १९७१ युद्ध
और सरहद
और सिज़ फायर में रोज मरते सैनिक
और अंत मे
फिर भी
आपको झेलता,
टूटता,
लड़खिड़ाता
जयचंदो से घाव खाता
फिर भी आपको सहजता
देश और सैनिक याद आ जाये
तो
भारत माता की जय
जय हिन्द।
मेरा भारत महान।
मत बोलना।
अच्छा नहीं लगता।
आईने देख कर
भीतर की सड़ांध देख लेना
और अपनी काहलियत
और बेबसी पर
फुट फुट कर रो लेना।
बस.
सुना है इस युग में
आंसू
गंगा की तरह पाप धोते है.
Friday, December 14, 2018
शहरी - गँवार
बीड़ी फूकते हुए
कम्बल ओढे हुए
टेलीविज़न वा देखते हुए
जितवा बड़बड़ाया
ई शहर का लोग
स्टूडियो में टाई कोट पहेन के
गांव की समस्या की बात करते हुए
कितना गँवार (देहाती) लगता है बे।
कम्बल ओढे हुए
टेलीविज़न वा देखते हुए
जितवा बड़बड़ाया
ई शहर का लोग
स्टूडियो में टाई कोट पहेन के
गांव की समस्या की बात करते हुए
कितना गँवार (देहाती) लगता है बे।
Sunday, May 20, 2018
Friday, March 16, 2018
मेरे गॉव
अक्सर गॉव जाते है शहर
तलाशते है मकसद
भिड़ते लड़ते पीटते
खोते है खुद को
आहिस्ता आहिस्ता
मगर जब भी बारिशे
भिगोती है माटी को।
नम आँखों की बरसातों से
भीतर सौंधी खुशबु फिर महकती है।
गॉव फिर जिन्दा हो उठते है।
मेरे गॉव फिर जिन्दा हो उठते है।
तलाशते है मकसद
भिड़ते लड़ते पीटते
खोते है खुद को
आहिस्ता आहिस्ता
मगर जब भी बारिशे
भिगोती है माटी को।
नम आँखों की बरसातों से
भीतर सौंधी खुशबु फिर महकती है।
गॉव फिर जिन्दा हो उठते है।
मेरे गॉव फिर जिन्दा हो उठते है।
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